September 28, 2015

Hindi Saahitya : Bimal Mitra


बिमल मित्र... शायद ही कोई हिन्दी साहित्य प्रेमी इस नाम से अनभिज्ञ होगा। बंगाली और हिन्दी भाषा में लेखन कला के लिए प्रसिद्ध बिमल मित्र जी के उपन्यास और कहानियाँ आज भी उसी चाव से पढ़ी जाती हैं। कहते हैं ना लेखक कभी मरते नहीं...वह अपने शब्दों में अपने पात्रों में जीवित रहते हैं। 



बिमल मित्र जी का जन्म 10 मार्च 1921 में हुआ। रेलवे विभाग में कार्यरत होने के कारण इन्हें भारत में कई जगहों को देखने का मौका मिला। उसी दौरान जन्य जीवन का निकट से अध्ययन किया। 1956 में नौकरी को अलविदा कह साहित्य लेखन से जुड़े। उपन्यास साहब बीबी और गुलाम इनकी मुख्य कृति है। जिस पर बनी फिल्म आज भी क्लासिक्स में रखी जाती है। 



इसके अलावा भी कई उपन्यास हैं जिन्हें किसी कालखंड में नहीं बाँधा जा सकता। बिमल मित्र जी की कहानियाँ हर वर्ग पढ़ता है। सब आसानी से बिमल मित्र जी द्वारा गढ़े पात्रों संग जुड़ाव महसूस करते हैं। कोई कृति सूकून देती है कोई उठल पुथल मचा देती है। हांलाकि ज्यादा नही पढ़ सकी बिमल जी को फिर भी...

ये नरदेह – मेरा परिचय बिमल मित्र जी के लेखन से इसी उपन्यास से हुआ। एक ऐसे रिश्ते की कहानी है जिसे किसी नाम में बांधना शायद मुमकिन ना हो, प्यार.. इश्क़.. बहुत ही छोटे शब्द है। संदीप लाहिरी और विशाखा मुख्य पात्र है जो कि आपको शायद प्यार की एक नयी परिभाषा सिखला दे। मुख्य पात्र प्यार में होकर भी कोई अधिकार नहीं मांगता और अपना सारा जीवन अपने प्यार के लिए खुशियाँ समेटने में बिता देता है। स्वार्थहीन प्रेम को बिमल मित्र जी ने अपने इस उपन्यास मे बखूबी दिखाया है! अगर आप को याद हो तो फिल्म अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ने इस उपन्यास पर बने टी.वी सीरीयल में अभिनय भी किया था। जिसका प्रसारण दूर दर्शन पर इंतजार और सही के नाम से हुआ था। 


नायिका – बिमल मित्र जी की नायिका में मुख्य पात्र एक ऐसी महिला है जो कि समाज की नजरों में सम्पूर्ण होते हुए भी अधूरी है। अगर आपने हिन्दी सिनेमा जगत की तीसरी कसम देखी हो तो शायद को-रीलेट कर पाऎंगे। बिमल मित्र जी का लेखन संवेदनशील है.. जो कि आपको कहानी के अंत तक इंसानी वजूद के कई आयामों से रूबरू करवाता है। यह भी खूबी है बिमल जी की उनके पात्र यथार्थता के करीब रहकर ही कहानी को आगे बढ़ाते है। 



सचमुच, मैडम को सम्भालना बड़ा ही टेढ़ा काम था। मैडम का किस वक्त कैसा मूड रहता है, यह शायद मैडम के सृष्टिकर्ता को भी नहीं मालूम था। रुपयों की या किसी फैशनेबल चीज की जरूरत हो, तब तो समझ में भी आए। लेकिन यह लड़की कब किस चीज के लिए खीज उठेगी, यह समझना किसी के वश की बात नहीं थी। बलाई सान्याल ने भी कम कोशिश नहीं की थी।


सबसे उपर कौन – अपने इस उपन्यास में बिमल मित्र जी ने बंटवारे (Partition) का दर्द प्रस्तुत किया है। मुख्य पात्र आबिद एक डॉक्टर हैं जो कि अपना वतन ना“ छॉंड़ने का फैसला लेते हुए हिन्दुस्तान में ही रह जाते हैं। फिर कैसे वो एक अनाथ लड़की का पालन करते हैं ये जानते हुए  कि वो हिन्दु है...बिना किसी की परवाह किए अंत एक पिता का फर्ज निभाते है कहानी इन्ही के इर्द गिर्द घूमती है। 


बिमल मित्र की श्रेष्ठ कहानियाँ – अगर आप लघु कथा प्रेमी है तो बिमल जी की कहानियों का यह संकलन आपको अवश्य पढना चाहिए। हर कहानी आपको  अहसासों का एक नया ही रूप दिखाती है फिर भी मुझे.. नाम, भूखी पीढ़ी, दूसरा पहलू और बेशर्म बेहद पंसद आयी।  जिंदगी के किसी एक खण्ड को द्रर्शाने वाली ये कहानियाँ अखण्ड  हैं.. अपने आप में पूर्ण।

कगार और फिसलन – बिमल मित्र जी के उपन्यास कगार और फिसलन में इनके व्यक्तित्व का नया स्वरूप सामने आता है। पढ़कर लगा ये किसी ऐसे लेखक की रचना है जिसने भारत में इतनी रूढ़ियों के बीच जन्म लेकर अपने लेखन को उन्मुक्त रखा। अगर आपने मुराकामी की स्पुतनिक स्वीटहार्टस’ पढी हो तो आप जान जाएंगे कुछ ही पृष्ठ बाद कि कहानी की मुख्य पात्र मिस श्रॉफ का अंत इतना मर्मांतक क्यूँ था। 

वही इसी किताब की दूसरी कहानी अटल दा, कुंती और इंन्दुलेखा के मध्य घूमती है जो अंत में एक संदेश पर खत्म होती है कि किसी के बारे में पहली नज़र में राय बना लेना आपको मूर्ख साबित करता है और कुछ नहीं। कुल मिलाकर किताब पाठकों को अंत तक बांधे रखती है।


अभी तक बस इतना ही पढ पायी हूँ.. बिमल मित्र जी को.. जानती हूँ काफी कुछ बाकी है शायद यह किताबें ही हैं जिन्दगी में... जो थोड़ा और जीने के लिए मजबूर कर देती हैं...। 

September 26, 2015

HALF CUP OF COFFEE : A Short Story

She put down the novel on floor, as chirping of morning interrupted her reading. She stared at the windowpanes and felt warmness of light on her face. It was third night— she was helplessly sustaining it without sleep. Her eyes got swollen, lips got dry. She cupped the black mug into her palms, smelled it deeply, that aroma brought reminiscent of their love for half-cup-of-Joe. She sipped that salted coffee alone, she might have forgot the taste of her tears but would it ever be possible to forget those book-ed evenings in the circle of his arms?

- Ankita Chauhan  

September 19, 2015

Anklet, Heena and A Fear - A Poem

Jingling of my anklets reached to your heart,
You run towards me and encircled my soul into your warmth,
Words dissolved into wetness, twinkled into our eyes,
A heart-storming silence caught us still,
You glanced at my heena dyed footsteps,
And a smile emerged from your lips to mine,
We shared those thrilling breathes,
A moment,
'And definition of our relationship would change its dimensions?'
There was fear in my eyes, quenching to survive on a belief
You whispered
'This knot wouldn’t change my love for you, not a bit.'
And you sealed my trembling eyelids with your lips.
    
- Ankita Chauhan 

Book Review : Bebaak by Kanchan Pant


टाईटल: बेबाक
लेखक: कंचन पंत
पब्लिशर: नीलेश मिश्र (कॉटेंट प्रोजेक्ट बुक्स) 
पेज- 177
रेटिंग- 5/5

अगर पता हो लाईफ में आगे क्या होना है तो ज़िंदगी विडीयो गेम नहीं बन जाएगी?

एक आम इंसान के दिमाग की कोडिंग कुछ इस तरह से की गई होती है कि वो सीखाने पर कम ऐक्शंस से ज्यादा सीखता है। जब कोई हमें समझाता है तो वो बात कभी काल्पनिक लगती और कभी लेक्चर। फिर भी लगता है जिंदगी हमारी है जीवन जीने का अंदाज़ भी हमारा होगा, फिर आती है कहानियाँ, लेखकों की ऐसी दुनिया जहाँ दर्द का अनुभव किए बिना दूसरों के अनुभवों से हम सीखते, उन्हें बकायदा महसूस करते हैं। हिन्दी साहित्य की भी अपनी दुनिया है जिसमें पिछले दिनों एक नया नाम जुड़ा ‘बेबाक – क़ंचन पंत’। हाँलाकि क़ंचन पंत एक नया नाम नहीं है इनकी कहानियाँ नीलेश मिश्र (Sir) क़े रेडियो शो YKIB में सुन चुके है सौ से उपर कहानियाँ लिख चुकी कंचन जी ने अपने श्रोताओं को बेबाक के रूप में यह खूबसूरत तोहफा दिया है। 

यूँ तो ग्यारह कहानियों का एक छोटा सा संग्रह है बेबाक जिसे एक दिन में पढ़ लिया मैंने। जहाँ भारी भरकम शब्द उबाऊ लगते है बेबाक का लेखन इस् सरलता से किया गया है कि लगता है एक नदी सी बह रही है और हम उसके पानी में पाँव डाले देख रहे हैं कहानी के पात्रों को आकार लेते हुए, या जैसे घास का हरा मैदान, खामोशी और कंचन जी की कहानियाँ कभी दिल को गुदगुदाती हुई कभी रुलाती हुई पर तय है अंत में कुछ ऐसा परोस देंगी आपकी हथेली पर कि लगेगा कितनी सारी लाइफ वेस्ट कर दी, अब वाकई जीना है ये कोई सेल्फ-हेल्प टाइप बुक नहीं है बस आपको शायद याद दिला दे आपके जीवन का कोई Phase.. जब हज़ार नाकामयाबी के बावजूद आप जिंदग़ी काटते नहीं थे, जीते थे।

कहानी का हर पात्र अपनें में बिखरा हुआ फिर भी कितना पूर्ण, कितना जीवित। दरअसल कचंन जी की लेखनी की और उनके नज़रिये की तारीफ करनी होगी, हम खुद को खड़ा पाते हैं उनके लिखे लफ्ज़ों के बीच। लगता है लेखक ने हमारी ज़िंदगी से वो सच चुरा कर यहां लिख दिया जिसे खुद से कहने से भी डरते थे हम।

वैसे तो सारी कहानियों अपना अलग अंदाज लिए हुएँ है तुलना करना शायद गलत हो फिर भी मुझे, ‘धनपुतलियाँ, तितलियाँ, ट्रेन का हमसफर, हैप्पी बर्थ डे मिसेज त्रिपाठी, सफेद पंखों वाला सारस, एक थी प्रतीक्षा’ दिल के करीब लगी, रुला दिया मुझे, होठों पर एक मुस्कान के साथ। किताब पढ़ ली गई है पर लगता है शायद ही कभी पूरी पढ़ पाउँगी।

क़ंचन पंत जी की इस अनमोल किताब के लिए नीलेश जी और उनकी क़ॉंटेंट प्रोजेक्ट की पूरी टीम को शुभकामनाऐँ और हाँ कवर पेज (क़्रुतिका जोशी) भी बेहद खूबसूरत है, कहानियों के हर एक पात्र का सटीक चित्रण..! 


लेखक के बारे में


पेशे से लेखक और पत्रकार है जो की 6 साल तक NDTV जुड़ी रही न्यूज रूम की हलचलों को जिया। और फिर कुछ नया करने का ख्वाब लिए लेखन क्षेत्र में कदम रखा। नीलेश मिश्र जी के शो के लिए 100 से उपर कहानियाँ, स्क्रिपट्स, स्क्रीनप्ले लिख चुकी, बेबाक कंचन जी की यह पहली किताब  है। जो कि अपनी सादगी से अपने अहसासो से दिल के अंदर चहल कदमी करती हैं। 

Happiness : Bebaak - Kanchan Pant

जिस किताब का इंतजार काफी समय से था और पहली बार कोई किताब प्री-ऑर्डर करते वक़्त नहीं सोचा था कि वो इतनी सारी खुशियों के साथ मिलेगी। नीलेश जी ने यहाँ भी अपना अंदाज़ नही छोड़ा और यही बात उनको सबके बीच रहते हुए भी भीड़ से अलग करती है, कंचन जी की कहानियांँ गाँव कनेक्शन में लिपटी हुई आयीं। और साथ ही क़िताब में नीलेश जी के हस्ताक्षर। कहानियाँ पढ़के लगा जितना सोचा था... उससे कहीं ज्यादा मिला ।दिल से धन्यवाद..! 






A million Thanks :) 

September 12, 2015

ग़ुलज़ार साब की एक नज़्म


पूरे का पूरा आकाश घुमा कर
बाज़ी देखी मैंने

काले घर में सूरज रख के,
तुमने शायद सोचा था, मेरे सब
मोहरे पिट जायेंगे,
मैंने एक चिराग़ जला कर,
अपना रस्ता खोल लिया.

तुमने एक समन्दर हाथ में ले कर, मुझ
पर ठेल दिया।
मैंने नूह की कश्ती उसके ऊपर रख
दी,

काल चला तुमने और मेरी जानिब
देखा,
मैंने काल को तोड़ क़े 
लम्हा-लम्हा जीना सीख लिया.

मेरी ख़ुदी को तुमने चन्द
चमत्कारों से मारना चाहा,
मेरे इक प्यादे ने तेरे चाँद का
मोहरा मार लिया

मौत की शह दे कर तुमने समझा
अब तो मात हुई,
मैंने जिस्म का ख़ोल उतार क़े
सौंप दिया,
और रूह बचा ली,

पूरे-का-पूरा आकाश घुमा कर अब
तुम देखो बाजी,
पूरे-का-पूरा आकाश घुमा कर अब
तुम देखो बाजी..

- गुलज़ार साब 
P.s - Tried to recite his Nazm. Found it Inspirational and heartwarming.(ग़ुस्ताखी माफ) 

September 11, 2015

RUSHDIESQUE - A Note

How often, we fascinate, the illusions tiptoed into our life, ruled over harsh reality. We sense comfort for a while, get lost into the pages of fiction, Authors take us into realm where jinn exist, they fly, some of them slither on the turf like snake. After reading Salman Rushdie, we run on the same old ground and his protagonist that amorphous creature flashes, his shadow inhibit into our sentience. Author’s world deliver us a cocoon, entwined into time of strangeness, we inherit his element. In the fast spinning wheel of realty we teeter on glimpses and his phrases.

- Ankita Chauhan 

September 07, 2015

Book Review : Mrs. Funnybones by Twinkle Khanna

Title: Mrs Funnybones
Author: Twinkle Khanna
Genre: Non-Fiction
Publisher: Penguin Books
Pages: 240
Rating: 5/5

Spot-on, she addresses pressing matters, in a light-hearted, breezy manner without coming off as a preachy martyr’ - Huffington Post

After writing myriads of articles, Twinkle Khanna aka Mrs Funnybones is going to launch herself as author.’ And twitter was bombarded with this news past days. I was like she is Mrs. Khiladi, She can do anything, anything means writing?

Frankly speaking I never took a risk to read her columns on TOI and when I heard that news, I hastily clicked on her blog, her sharp whimsical writing entangled me for a while and I put a bookmark on it.

So Mrs. Funnybones I appreciate your work whole heartedly. When world is full of chaos, news media is full of Rapes, Robbery, Wars. You came up with a thought of ‘Let’s Make Everyone Smile’ and Congratulations. You Accomplished. At least in my case, I almost bit my fingers to stop those giggles while digging your funnybones.

Basically this book provides a magical camera in your hands to peer into some not so celebrity but an Indian woman's life, she worries about her prodigal son, she sensed just like a ordinary daughter-in-law and perform all rituals, she fights with perverts while jogging, she loved to spend time alone with her man, she also takes advises and try to get some relief by local acupuncture doctor (The most laughable part), she cooks, cleans her house and many jobs. And the most amazing part is she could still able to find world class humor in these local chores. Applause!

It took couple of hours to complete it. It was like someone glued my eyes on the pages or As if I were stopped, someone would have kicked me out from the laughing ride. I’m not going to comment on her writing skills because I loved the way she writes, light heart, her articles flow as waves of breeze. She writes with ease, without being hotch-potch, just plain and simple with loads of witty one-liners. Here 
 I’m presenting some giggling part I laughed at, the most.

About Karwa Chauth - ‘There are 146 countries above us where the men have longer lifespans, and the biggest blow is that even with four wives who don’t fast for them, the Arab men outlive our good old Indian dudes.’

About her antiques-lover mom - She starts giggling and says, ‘I am just joking.’ I tell her, ‘It’s not funny, Mom, and sometimes you really do make stupid mistakes.’ She snorts, ‘That’s true, I made you.

About complaining for her name - My mother found new and unique ways to embarrass me, starting at birth when she decided that naming me Twinkle was a foolproof way of making sure that I would get teased throughout my life, have immigration officers at various airports stare at my passport and shake with hysterical laughter and strangers stalk me with WhatsApp messages like, ‘Twinkle, Twinkle, little star, I hope you get hit by a car!’

About that UnZip incident - The man of the house has a big fat cheque from the denim company and he also has the Padma Shri, while I have the privilege of carving out my place in the history books by taking part in an obscene crime. Blimey!

About Food: Punjabi mother, her son and food form a triad as sacred as Brahma, Mahesh and Vishnu, and cannot be interfered with as I learnt in the early years of my marriage.

About talking with her child:
Him: ‘Mom, can I pack my pepper spray?’
Me: ‘I don’t think you will need it, the teachers are around you 24/7!’
Him: ‘That’s why I need it!’

A message: I ask him “what will you do if something doesn’t work out?’ He says, ‘I will keep trying and never give up!’ and I tell him, ‘No, remember, the only person you can ever change is yourself; after you have done that and you are the best you that you can be, let go. There is always another job, another woman, another best friend. Each day that you persist in a situation where you are miserable is a day wasted on the path that would lead you to happiness.
Give it a try to get some roller coaster ride for your belly. Must Read!

P.s - It's important to mention here, who edited the book. Chiki Sarkar, Great Job!  

About The Author:


Twinkle Khanna, aka Mrs Funnybones, crafts satirical stories and funny fables when she is not running a design business, selling candles or running in circles around her small but rather odd family. She narrowly escaped a gruesome tragedy when Bollywood tried to bludgeon her brain to the size of a pea, but she ducked at the right moment and escaped miraculously unharmed. She is a popular columnist and is a regular contributor to The Times of India and DNA After Hrs. Currently, she is in the process of creating lame jokes like, ‘Why do all Hindu boys worship their mother? Because their religion tells them to worship the cow.’ She firmly believes that nothing in life is sacred except laughter.

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September 06, 2015

Book Review: Tell Me a Story by Ravinder Singh


Title- Tell Me a Story: An Anthology
Author- Ravinder Singh (Editor)
Genre- Fiction, Short Stories
Pages- 240
Publisher: Penguin Metro Reads
Rating: 5/5

Ravinder Singh, No matter what people say but here is a little confession, His First Book made me weep, I wept like a child, now I laugh my stupidity but maybe there was some teenage element then. I reread it many times and still felt refreshing. Some books just born to mesmerize us, I Too Had a Love Story was one of them, I hardly know a girl who had read this book and could resist herself to fall in love with the author. That’s the beauty of books. Either you love the characters or the one who created them.

September 05, 2015

शिक्षक : एक कविता

शिक्षक वह पुल है जो आपकी उंगली थामकर
आपको अज्ञानता के अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाता है।

शिक्षक वह आयाम है जो आप पर अपनी राय थोपे बिना
आप जिदंगी में क्या करना चाहते हैं, उसको निखारने में मदद करे।

शिक्षक वह दिशा है जब सभी रास्ते बंद नज़र आये तो
अर्जित किया ज्ञान पुंज, आप के अंदर प्रज्वलित कर सके।

शिक्षक वह मुस्कान है जो आपकी हर सफलता को सराहे
साथ ही असफलता के दौर से जूझने का साहस दे।

शिक्षक वह शख्स है जो आपको अंकगणित सीखाते हुए

आपके जीवन की अभिन्न कविता बन जाए! 

- Ankita Chauhan 




Book Review: Making India Awesome by Chetan Bhagat


Title: Making India Awesome
Author: Chetan Bhagat
Publisher: Rupa Publications
Genre: Non-Fiction
Pages: 192
Rating: 5/5

“Many writers are successful at expressing what’s in their hearts or articulating a particular point of view. Chetan Bhagat’s books do both and more.”
A.R. Rahman,

Few writers stay in our lives with a Tag “whatever you say, feel and think but you can’t ignore me’. This line sets best on Chetan Bhagat Sir. He knows what to say how to say, just like some professional who knows his part in others life very well. Every time he announced his new book, we wait while we know there will be another love story, but we can’t read literature all the time, heart needs party time too.

“Don’t kill yourself in trying to have it all. Just be normal, admit you won’t be excellent at everything every day and smile through life.” 

September 04, 2015

MASSACRE : A Note

There was deathly silence, 
imprisoned souls, 
seized minds. 

A while ago someone demolished 
all the thoughts, 
all the questions raised 
in that little devil’s head. 

Someone marked the windows, 
which shouldn’t be opened. 

He listened, 
grasped every bit. 

That world was naive for him, 
where dreams, 
hope, and 
innate desires of his own, 
massacred already. 

- Ankita Chauhan 

Solitary Flight - A Thought

Source

A teardrop trickled down 
his fragile feathers 
while watching them to fly. 

One by one
 
all the heavenly bodies 
left the nest 
but the fluffy one. 

He too tried to
 spread wings, 
Limped, crumpled, 
tried again 

But those undeveloped muscles
 
weighed him down. 

He understood
 
He has to wait 
As nature wants to embrace his 
Solitary flight. 

- Ankita Chauhan


ARTIST - A Note


The day 
she was being left 
amidst howling of emptiness. 
Destruction occurred to her.
Her wrecked soul flooded, 
suffocated from remembrance. 
She stretched her crafty realm. 
She didn’t even know 
if it existed before. 
She arrested into unknown, 
captured few isolated moments for herself and 
transformed her every tear into verse. 
People call her artist.

- Ankita Chauhan


STROKE - A Short Story



His still lips drift apart and an addiction crawled into his brain. His closed eyes nestled up comfortably amidst puffs of fumes. His facial muscles relaxed and her soul freed from the yearning of conversations. He inhaled that blank moment swiftly and discarded the fake affirmations one by one. Each puff veiled bottomless longing, his tears dried and escaped into the world as smoke.  He lied to himself once, nobody can wait forever, wound heals, pain departs, and that’s the way we live... I’ll celebrate life.”

Life chuckled ‘Play with philosophical versions, but I won’t be an easy call.’ 

- Ankita Chauhan