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September 18, 2018

Story: Yaadon Ka Idiot Box with Neelesh Misra - Chaukhat (Aired on 92.7 BigFM)


दो पौधे मिट्टी में रोंपकर, थोड़ा खांसते हुए, मैं कुर्सी पर आकर टिक गयी। पलकों में भारीपन महसूस हुआ। ये थकान पचास की उम्र को छू चुके शरीर की नहीं थी। मेरा मन थक चुका था। कभी इंतजार करते हुए, तो कभी किए जा रहे इंतजार को दुनिया की नजरों से छुपाते हुए।

धुंधलाई नजरों से मैंने आसमान को देखा। गहरे-जामुनी बादल बरसने को तैयार खड़े थे। हथेली से घुटनों को सहलाते हुए मैंने तनु के कमरे की ओर नजर डाली। खिड़की अब-तक बंद थी।

“ये लड़की भी जाने कब बड़ी होगी, आठ-बजे तक कौन सोता है” चेहरे पर गुस्से में घुली-मिली मुस्कान आ गयी।

सुबह होने पर मैं अक्सर भूल जाया करती थी कि इस घर में मेरे अलावा एक और शक्स है....तनु। तनु को सिर्फ एक रिश्ते में बाँधना मुमकिन नहीं था। वो मेरे लिए क्या थी ये सिर्फ मैं ही जानती थीं, मेरी वर्क-पार्टनर, शाम की चाय पर चियर्स कहने वाली दिलपंसद साथी या मेरे इकलौते बेटे कबीर की मंगेतर... 



August 31, 2018

Story - Yaadon Ka Idiot Box with Neelesh Misra : Nani Ka Baksa (Aired on 92.7 BigFM)

Poster Courtesy Big FM
बस अपने तयशुदा वक्त पर चल दी। खिड़की से आती ठंडी हवा की सरसराहट मुझे उस घर की याद दिला रही थी जो पाँच साल पीछे मेरी यादों में ठहरा था। नानी-माँ का घर। मेरा मन, खुले आँगन में बिखरी यादें बीनने लगा।
आँवले के मुरब्बों की गंध मेरी नाक में भर गयी। आँखे मिचमिचा उठी, जैसे रात को छत पर, नानी की साड़ी के आँचल से छनता चाँद देख लिया हो, कई रंगो से घिरा चाँद।
उन दिनों भोलू सारी रात गली में भौंकता था। झिंगुर की आवाजें सायरन-सी सुनाई पड़ती। तब नानी मुझे अपने सीने से चिपकाए नए-नए भगवान की कहानी सुनाती। जहाँ सुबह की नींद अलार्म-क्लॉक से नहीं मोर की बोली से खुलती, जहाँ की दोपहरें चिलचिलाती धूप नहीं, पौधों की गहरी-हरी-छाँव समेटे होतीं।
जयपुर के पास बसा वो छोटा-सा कस्बा मेरी नानी का घर था। जहाँ कभी सबसे जरूरी इंसान था...मैं।

Story - Yaadon Ka Idiot Box with Neelesh Misra : Yaar-e-Mann (Aired on 92.7 BigFM)

Poster Courtesy: Big FM
वो मेरी ही तरफ बढ़ रही थी। कदम दर कदम, लम्हा दर लम्हा। जरा-सा झुककर कभी पैरों से लिपटी भीगी साड़ी को अलग करती हुई। तो कभी चेहरे से अधगीले बालों को हटाती हुई। 

जब उसने आँखो पर चढ़े गोगल्स को उपर सरकाया तो मेरे अंदर एक अजीब हलचल पैदा हुई। उसकी गहरी आँखों में आज भी उतना ही गहरा काजल था जो शायद बारिश में भीगने की वजह से जरा फैल गया। ये सोचते हुए मेरी नजरे विंडो-ग्लास पर गयी, बाहर बारिश सचमुच तेज़ थी।

इस बीच विदी से मेरी नजरें टकरायीं, वो टकराहट मानो हम-दोनों को बुत-सा कर गयी, स्टोंड, स्टैच्यू। मेरे होंठ बुदबुदाए। उसके होंठ मुस्कुरा कर रह गए, एक अनचाही, अनबोली मुस्कान।

कई सवाल मेरे मन में खलबली मचाने लगे। उसने पहचान तो लिया होगा? मेरा नाम भूली तो नही होगी ना? सिड कहेगी, या तकल्लुफी में सिद्धार्थ? सोचते हुए मैंने गहरी साँस ली।


June 22, 2018

Storywallah: Short Stories (Neelesh Misra's Mandali)



नीलेश मिसरा सर की आवाज में आपने रेडियो पर, सावन एप पर, यू-ट्यूब पर कई कहानियाँ सुनी होंगी। एक दशक होने को है। कहानियों में रिश्तों की गर्माहट होती है, नॉस्टेलिया होता है, साधारण लोंगो की असाधारण कहानियाँ हैं ये। एहसासों की ये भीतरी यात्रा अब एक किताब की शक्ल में आ रही हैं, नाम है स्टोरीवाला, पेंगुईन इंडिया प्रकाशक हैं। किताब 21 जून से अमेजन पर उबलब्ध है। क़िताब का हिस्सा हूँ खुश हूँ, हैरान हूँ, सपने साँस ले रहे हैं।


Photo Source: Ajendra Singh Bhadoria
Buy Link: STORYWALLAH (Penguin Books) 

March 04, 2018

Short Story: Joycee (The Neelesh Misra Show)

शाम के पाँच बजे थे। बालकनी से धूप सिमटते देख, मेरे हाथ और तेजी से चलने लगे। एक-एक कपडे की पॉकेट चेक-कर, मैं उन्हें वाशिंग-मशीन में डालने लगी। तभी सरसरी निगाह से मैंने कमरे में देखा। बिस्तर पर कुछ कपडे छूट गए थे। मैं अंदर आयी तो कमरे में फैली खामोशी ने घेर लिया। मैंने बैड पर लुढके रेडियो को ऑन कर दिया।
दिल्ली FM पर कोई पॉप-सांग चल रहा था। अगर गाने, मूड के हिसाब से ना बजे तो कितने बेसुरे लगते हैं। रेडियो ऑफ करके, मैं वहीं बिस्तर पर बैठ गयी। कमरे में फिर खामोशी साँस लेने लगी।
चादर पर पडी सलवटें निकालते हुए, मैंने हाथ बढाकर सिरहाने रखा कुशन उठा लिया। उसपर बने चेहरों को देखकर, पाँच महीने पहले की वो भीगी शाम याद आ गई।



Short Story: Do Dilon Ke Beech (The Neelesh Misra Show)

वो मेरे घर की छत पर खडी थी। आँखो से अक्टूबर की गुनगुनी धूप सेकती हुई। उसका एक हाथ कमर पर था और दूसरा हाथ दाँतो पर ब्रश घुमाने में व्यस्त, वो खुद में इतनी डूबी हुई थी जैसे दाँत साफ करना दुनिया का सबसे जरूरी काम हो। पीछे गर्दन पर झूलते जूडे से कुछ बाल निकलकर आगे कंधे पर आ गए। जिसे उसने ऐसे ही रहने दिया। वो कभी दो-कदम पीछे जाती, कभी चार-कदम आगे। कभी झुककर मुंडेर पर रखे गमलों को देखती तो कभी आँखे मिचकाते हुए मेरे घर के चारों ओर फैली पेड़ो की लम्बी कतारों को। 

इधर-उधर डोलती उसकी नजरें इस बीच मुझसे टकराई। वो थोडी असहज हो गयी। उतनी ही जितना मैं हुआ, उसे अपने घर में देखकर। 




Short Story: Hone Wale JijaJi (The Neelesh Misra Show)


मैनगेट पर होर्न की आवाज आते ही मैं भागकर घर के अंदर आ गया। एक नजर ताईजी को देखते हुए मैं जल्दी-जल्दी सीढीयाँ चढने लगा तो वो साड़ी के कोने से चश्मे को रगड़ते हुए बोलीं वासु सुन तो

आया ताईजी कहते हुए मैंने उपर मेघा दी को आवाज लगाई। मेरे पहुँचने से पहले मेरे शब्द कमरे में पहुँच चुके थे।

पूरी की पूरी बारात आई है...दी हाँफते हुए मैंने पर्दा हटाया और एक नजर कमरे पर डाली। हर चीज बिखरी थी, बिस्तर पर कपडे थे, तौलिया नीचे फर्श पर, कबर्ड खुली थी, पंखा फुलस्पीड पर लेकिन इन सबके बीच वो नहीं दिखी जिनकी आज सगाई थी।




April 21, 2017

Lamha Lamha Zindagi : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra



यहाँ पहले दिन सब कुछ अजीब था। लगा आँखो के सामने डॉक्यूमैंटरी-फिल्म चल रही हो। दिल्ली, शहर था या रंगीन दिलों का अजायबघर, नहीं जानती। आसमान को चीरती उँची बिल्डिंग्स। कहीं न खत्म होने वाली सड़के और उनपर इतनी गाडियाँ कि दिन में तो सड़के दिखाई ही नहीं देती थीं।


सबसे अजीब मुझे वो मैट्रो लगी। जिसका लेडीज़ कम्पार्टमेंट जैसे गुल्लक में बजते सिक्के। कुछ दिन जरूर मुझे उलझन महसूस हुई...फिर लगा जैसे मैं इन लड़कियों को पहचानती थी। हर किसी के चेहरे पर फिक्र, आँखों में बैचेनी, जैसे घर की दहलीज पार करने के बावजूद भी वो अब-तक कहीं अटकी थीं। यही सब तो था जो मैं जोधपुर में छोड़कर यहाँ दिल्ली चली आयी थी। मेरी बचपन की दोस्त आमेरा के पास।



March 15, 2017

Khoyi Baarishein : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra


तुमने लिस्ट चेक कर ली? कुछ और चाहिए तो अभी बता दो, वहाँ पापा नहीं मिलेंगे मैंने कहा। मैं उससे ज्यादा शायद खुद को विश्वास दिला रहा था कि कुछ दिन बाद निखिल मेरे साथ नहीं होगा।



आप तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे मैं हमेशा के लिए जा रहा हूँ  कहते हुए वो दरवाजे पर एक थपकी देकर कमरे से चला गया। उसकी हथेली की वो थाप उस दरवाजे पर नही जैसे मेरे दिल पर लगी थी। जाने के बाद वापस लौटना क्या इतना आसान होता है, क्या मैं लौट पाया वापिस कभी अपने घर? ये सवाल मेरा खुद से था, जिसका जवाब ढूंढने की ना जाने क्यूँ मैंने कभी कोशिश ही नहीं की?

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February 10, 2017

Prem Patanga : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra

यहाँ छत पर मेरे सामने खड़ा ये बत्तमीज लड़का क्या वाकई मेरे बचपन का दोस्त कुनाल था? उसके कहे शब्द अब तुम इतनी भी अजनबी नहीं हो मेरे दिलो-दिमाग में गूँज रहे थे। धड़कनों में शोर था लेकिन मैं चुप थी। क्या जबाव देती उसे? बचपन का वो पक्का दोस्त जो कहीं खो गया हो उसके अचानक सामने आने पर, क्या जवाब दिया जाता होगा, ये मुझे पता ही नहीं था।

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December 27, 2016

Panah : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra

अभी कुछ देर पहले तक मेरी जिंदगी वैसी ही थी जैसे बीते छ: सालों से हुआ करती थी। अलार्म बजते ही आधी-नींद में स्प्रिंग की तरह उचक के खड़े हो जाना। बिखरी फाईल्स को बिस्तर से समेटना। लैपी चार्जिंग से निकालकर, मोबाईल चार्जिंग पर डालना। इस बीच दो मिनट चुराकर ट्वीटर चेक कर लेना। मूड अच्छा हुआ तो डीपी बदल दी और अगर मूड खराब हुआ तो 140 शब्दों में जरा आउट-रेजिया देना। और सबसे जरूरी काम, घर से निकलते वक्त मेरे दोस्त, निखिल के उन दो-चार रोमांटिक मैसेजेस पर वो किस्सी वाली स्माईली चिपकाते हुए गाड़ी का स्टीयरिंग घुमाना और ये पहुँच गई मैं सीधे ऑफिस।
लेकिन आज लग रहा था जैसे मेरे हंसते-खेलते रूटीन का स्टीयरिंग, उछलकर किसी और के हाथ में चला गया हो

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November 05, 2016

Story - Nazdeekiyaan - Qisson Ka Kona with Neelesh Misra



उसके वो बेमकसद सवालों के जबाव ढूंढना मुझे अच्छा लगता था, उसके गीले बालों की खुश्बू, वो अचानक से आकर मेरे कंधे पर उसका हाथ रखना, ज़िद करके मेरी ही प्लेट में खाना-खाना, और रात को सोते वक्त मेरे हाथ को खींच कर तकिया बना लेना, अक्सर मुझे हैरानी में डाल देता, कोई कैसे इतनी जल्दी इतना करीब आ सकता है, मेरी समझ से परे था। 


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October 02, 2016

Story - Jo Yahin Rah Gaya - Qisson Ka Kona with Neelesh Misra (On Jio Saavn App)


Show Title : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra 
Story Title : Jo Yahin Rah Gaya 
Hosted App : Saavn 
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September 25, 2016

Story - Aadhe Adhoore: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( Streaming on Jio Saavn App)


Story Title: Aadhe Adhoore 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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ये जाते हुए दिसम्बर की एक सर्द रात थी। आसमान के ज़िस्म पर...बिछे अनगिनत तारों को मानो ठिठुरन से बचाने के लिए...सफेद कोहरे ने अपने अंदर समेट लिया था...। रात के बारह बज चुके थे....भले मुम्बई की सड़को पर अक्सर शोर रहता था...लेकिन राह चलते लोगों की आँखों में मुझे ना जाने क्यूँ हमेशा एक कशमकश...एक खामोशी ही दिखती। 

मैं, माया...अपनी बिल्डिंग के बाहरवे माले पर बने...इस बारह बाय दस के कमरे में...बत्तीस मोमबत्तियों की झिलमिलाती रोशनी के बीच घिरी...कभी लौ की तपिश...तो कभी एक कंपक़ंपी महसूस कर रही थी। एक बार फिर मैंने मोमबत्तियों को गिनना शुरु किया...इस बार इक गहरी सांस के साथ...एक दो तीन....ह्म्म पूरी पैंतिस ही थी।

पिछले सात सालों से ऐसे ही तो मनाती आ रही थी...मैं अपना जन्मदिन सबसे दूर..एकदम तन्हा...साथ के लिए होती भी थी...तो बस यही झिलमिलाती...मोमबतियाँ और कुछ बदलता था तो...इनकी साल दर साल बड़ती संख्या और इसके साथ....मेरी पल-पल पिघलती उम्र। 


Short Story - Woh Hamasafar Tha : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( On Jio Saavn App)


Story Title: Woh Hamsafar Tha 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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आज फिर मेरी रात चाँद की पहरेदारी करते गुज़र गयी थी जैसे सिया के जाने के बाद अक्सर, मेरी रातें गुज़रा करती थीं...दम तोड़ती हुई, खामोशियों को थोड़ा और खामोश करती हुयीं।

मैंने खिड़की से बाहर नज़र डाली...सूरज आसमान पर गुलाबी रंग से तस्वीर खींचने में लगा था। लेकिन मेरी ज़िदंगी की तस्वीर के मानो हर रंग फीके पड़ गये थे। मेरी नज़र कमरे की दीवार पर टंगे एक कोलॉज़ पर ठहर गयी...जिसमें मैंने अपने अतीत के जीते-जागते लम्हे सहेज़ रखे थे।

ये तस्वीरें ही तो थी, जो मुझे जीवित होने का अहसास करवाती थीं। कभी मेरे होंठों पर मुस्कान रख जाती तो कभी जबां पर रख देती...एक बर्फ-सा ठिठुरता नाम सिया
सिया के साथ शादी का एक साल पूरा करने के बावजूद, प्रखर यानि मैंने जब उसकी गोद भराई पर उसके काधें पर अपनी हथेली टिकाई तो वो कुछ सकुचा गई थी, मेरी ओर देखकर मुस्कुराते हुए उसकी नज़रें झुक गयी। वो खूबसूरत पल कैमरे में कैद हो चुका था, वो पल उतना ही जीवित था....उतना ही सच्चा, जितनी सिया की सुरीली आवाज, उसका वो संगीत...उसकी वो धीमी-धीमी गुनगुनाती सांसे..। 


Short Story - Saanson Ki Mala Mein : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( On Jio Saavn App )


Story Title: Saanso ki Mala Mein 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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उस दिन साँची के रिश्ते की बात पक्की हुई तो बोली—“माँ, नो शो-ऑफ प्लीज़....सब सादगी से होगा ना? यह कहते हुए उसने अपने काँपते हाथों से मेरी हथेली को थाम-भर लिया था। मेरे साथ-साथ उसने भी ताउम्र एक कड़वा सच जिया था। चिंतन हमारी गुजरती हर साँस का हिस्सा होते हुए भी हमारे साथ नहीं थे। जल्द ही सब समझने लगी थी वो, माँ के अहसाओं को उम्र से पहले पढ़ना सीख रही थी। बेटी कम एक हमकदम दोस्त ज्यादा थी और आज उससे दूर होने की कल्पना-मात्र मेरे अंदर एक सिरहन पैदा कर रही थी।

महीनों की भाग-दौड़ चन्द लम्हों में सिमट गई। सामने सांची सिर झुकाए, पायल की रून-झुन झंकार लिए दहलीज़ की ओर बढ़ रही थी। तो मन ना जाने कैसे-कैसे सवालों से घिर गया क्यूँ विदा करते हैं लोग बेटिय़ाँ? ये कैसे दकियानुसी रिवाज़ हैं...जो अपने जिस्म के टुकड़े को एक दिन परायेपन का तमगा थमा, उसकी जड़ से अलग-थलग कर देते हैं?  

मेरी नज़रें उसकी नज़रों पर टिकी थी। कितना मनाना पड़ा था उसे शादी के लिए। उसके हर एक तर्क को मैंने अपनी बाईस साल की तपस्या का वास्ता देकर चुप तो करा दिया था, लेकिन उसके हाथों से छूटती मेरी उंगलियों की पकड़ और उसका वो अचानक से उस बंद होते शीशे से झांकना मुझे खाली-सा कर गया। साँची विदा हो गई। 


Story - Saat Samandar Paar : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( On Jio Saavn App)

हवा में ठंडक थी। अलसाई रात को नर्म बादलों में समेट, खिड़की से झीनी-झीनी सुबह झांक रही थी। मेरा मन अधखुली आँखों पर चादर डाले करवटों के इर्द-गिर्द कुछ ख्वाब बुनने लगा, ख्वाब...जो उस शाम विनय ने मेरी इन गहरी पलकों पर रख दिए थे। उस दिन ऑफिस-मीटिंग के बीच में अपनी बॉस की नज़रें बचाकर उसने मुझे मैसेज किया
पैकिंग करना शूरू कर दे मेरी एलिज़ाबेथ, वी आर गोइंग टू कैनेडा...सून उस सून की स्पैलिंग में लगे बीसीयों ‘ओ’ विनय की खुशियों का पता मेरे होंठों को दे रहे थे। खुश थी मैं, इन बीते आठ महीनों से ज़िंदगी जैसे मुझपर मेहरबान थी।

राजस्थान से नोएडा और नोएडा से राजस्थान के बीच अपनी ज़िंदगी के बाईस साल काटने वाली रेवा, यानि मैं पहली बार परदेस जा रही थी। । मेरी आने वाली ज़िंदगी अपने दायरे से निकलकर नए साज...नई धुनों पर थिरकना चाहती थी।

इस बीच विनय ने मेरी सैँडल हील्स से लेकर, मोबाईल की रिंगटोन तक बदल डाली थी लेट मी बी योर हीरो..। पार्टीज के दौर चलने लगे थे। उधर वो अपने दोस्तों से, कैनेडा में ढाई साल के प्रोजेक्ट की बँधाईयाँ समेट रहा था और इधर मैं चन्द सूकून भरे लम्हें...या कहूँ जरा-सी हिम्मत तलाश कर रही थी।

Story Title: Saat Samandar Paar
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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Story - Meri Sudha : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra


Story Title: Meri Sudha 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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उसकी आँखें किताबों की बुक्शेल्फ को यूँ अपलक निहार रही थीं...जैसे दरख्त की उस अलमारी में किताबें नहीं कुछ ज़िंदगियाँ लिपटी हुई हों। कभी उसके लब किताब की एक-दो लाईन्स दोहरा लेते, तो कुछ किताबों का हल्का-सा स्पर्श पाकर उसके चेहरे पर सुकून-भरी लकीर खिंच जाती।

वही सादा सा लिबास...गहरी आखों में हल्का काजल, बेशक सूट की जगह खादी की एक स्टार्च्ड सफेद साड़ी ने ले ली थी और उस पर बेतरतीबी से बिखरे हुए छोटे-छोटे गुलाब जैसे... माली काका ने अभी-अभी अपनी फूलों की टोकरी खाली की हो। बाल भी कुछ लम्बे हो गये थे, एक ढ़ीली-सी चोटी उसके सफेद आँचल में लुका-छिपी का खेल, खेल  रही थी।

मेरी ट्रेन जो कोटा से चलकर जयपुर तक जाने वाली थी। अभी-अभी माधोपुर-स्टेशन पर ठहरी थी। प्लेटफॉर्म पर हलचल थी, कोई पानी की बॉटल के जुगाड़ में लगा था....तो कोई ट्रैन की हर खिड़की तक आवाज़ लगाते हुए दाल-बड़े बेच रहा था।  

लेकिन रेलवे स्टेशन से ज्यादा हलचल मेरी नज़रों में थी। मैंने ट्रैन की इस छोटी-सी खिड़की से, इतनी भीड़ के बावजूद स्टेशन के बुक स्टोर पर एक ऐसा चेहरा देख लिया था, जो मुझे फिर से मेरे अतीत में सिमटी यादों के गलियारों में ले जा रहा था।


मैं अपनी ट्रैन से उतरकर, बेतहाशा भाग रहा था...ढूंढ़ रहा था उस जाने पहचाने चेहरे को, जो मेरे अस्तितव में एक अज़ीब हलचल पैदा कर गया था।



 

Story - Lamhe Guzar Gaye : Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( On Jio Saavn )


Story Title: Lamhe Guzar Gaye 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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उम्र की दहलीज़ पर एक और दिन ढल रहा था। शाम के सात बज चुके थे। मैं इस कॉटेज़ की बॉलकनी में खड़ा...सामने फैले उस लाल सूरज़ को समुद्र में डुबकियाँ लगाते देख रहा था।

अकेला, चुप, खाली...आज हाथों में ना तो कोई काम था, ना ही कोई ऑफिस की फाईल। बस बालकनी की इस रेलिंग को कसकर थामे जैसे मैं भागते वक़्त को...रोकना चाह रहा था। थामना चाह रहा था उन लम्हों को, जो पिछले तीन सालों से एक रिश्ते का चेहरा ढूंढते हुए मुसाफिर-से हो गए थे।

जैसे-जैसे सूरज रात की बाहों में समाने लगा, तो शोर मचाती अवारा लहरें भी अलसाने लगी जैसे शाम ढलने पर वो भी अपने घर लौट आयी हों, मेरी तरह...।
नहीं...ये घर, ये कॉटेज़ मेरा नहीं था। मैं, तो अपनी ज़िंदगी में पहली बार केरला आया था, पहली बार समुद्र देखा था, गीली रेत पर बिखरी सिपियाँ देखी थी, पहली बार कोई बीच देखा था।

और पाँच दिन के लिए, इस केरल बीच पर, जिसके साथ आया था वो अंदर कमरे में लेटी हुई थी। मैंने पलटकर खिड़की की ओर देखा तो गुलाबी परदों के पीछे से उसकी वो हल्की-सी झलक मिली। वो ऊन के किसी नर्म गोले की तरह बिस्तर में सिमटी पडी थी। परदों से छनकर आती रोशनी के टुकड़े उसकी आँखों पर ठहरे थे और रेशमी बालों की वो लम्बी-सी चोटी बिस्तर से नीचे की ओर ढलकी हुई थी, वो पूर्वी थी...मेरी पत्नी। 

Story - SIRFIRA :Qisson Ka Kona with Neelesh Misra ( On Jio Saavn )


Story Title: Sirfira 
Show Title: Qisson Ka Kona with Neelesh Misra  
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आज मौसम कुछ भीगा था। सुबह से होती रिमझिम बारिश...और तेज़ हो गई थी। मैं इस होटल के कमरे में खड़ी थी, खिड़की पर सिर टिकाए बूंदो की इस झड़ी के थमने का इंतज़ार कर रही थी। ना जाने क्या सोचकर मैंने खिड़की के काँच को सरकाते हुए हाथ बाहर निकाला तो बारिश की भीनी खुशबू लिए कुछ बूंदे हथेली पर ठहर-भर गई।

ज़हन में अबीर का ख्याल गूंज गया। बारिशे कितनी पंसद थी उसे। सामने कांच पर छितरी बूंदों के बीच जैसे कुछ अक्स से उभरने लगे। कहीं बारिश के पानी में पैरों से छपाके मारता अबीर था, तो कहीं कागज़ की नाव बनाकर उसे हाथ से आगे ढकेलता अबीर। वो कहता था ये बारिशें नहीं सुलगते दिलों का हैल्थ-ड्रिंक है और हंसते हुए मुंह खोलकर हर-एक बूंद को खुद में समेटने की कोशिश करता। उसकी यहीं नादानियाँ मुझे उसके इतना करीब ले आएगीं...ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।