March 29, 2014

खुद के लिए !

Photo Courtesy - Google 

वो कहते हैं
कुछ कर नहीं सकती ना
तो लिखती है
चंद शब्दों के जोड़ भाग में
वक़्त ही गुज़ार लेती है अपना ...

सही मायनों में
जानती हूँ मैं, कैसे
एक-एक याद पर जमीं ग़र्द झाड़
एक-एक छवि को
लफ्ज़ दे,
बचा रहीं हूँ “ खुद को “ ख़ाक होने से ...

सहेज़ रही हूँ
अपनी ज़िंदगी के
कंठ में गूँजते अलाप का

सबसे मीठा स्वर ...!! 


- अंकिता चौहान