March 23, 2014

पंखुड़ियाँ - 3

Photo Courtesy - Google 

1.

लौट कर इक बार फिर ..
अपने वादों को सच्चा कर, या
मेरी सांसों को झूठा कर जा ॥


2. 
दिल पर ज़ख्म
इस कदर दिये जाते हैं,
ज़िन्दगी चन्द लम्हों का
किस्सा हो जैसे ॥


3. 
हाथों की इन बेमानी लकीरों से
प्यार है मुझे,
ये उस वक़्त भी साथ थीं,
जब ज़रूरत थी तेरी ॥


4. 
ना पूछ कैसा आलम था
बिछड़ते हुए जब उसके दिल को,
मरहम दिया . . मेरे अश्कों ने ॥


5. 
कल रात फिर
तेरी यादों की महफिल सज़ी,
हर अश्क़ मेरा
तेरी हथेली को तरसा रात भर ॥


- अंकिता चौहान