May 08, 2014

Book Review : प्रेरक प्रसंग - राष्ट्रबन्धु



जब भी हम भविष्य की ओर कदम बढ़ाते हैं तो अतीत पीछे छूटता जाता है, यह गलतफहमी है हमारी । वरन हमारा अतीत और उससे जुड़े पात्र हमारे वर्तमान की परछाई बन साथ साथ चलते हैं, हमारा मार्गदर्शन करते हैं ।
गत दिनों राष्ट्रबन्धु जी की किताब प्रेरक प्रसंग पढ़ने का अवसर मिला । साधारण सी दिखने वाली ये किताब अपने राष्ट्र के लिए जीने वालों का आकलन बहुत ही सरलता से करती है । कई दिग्गज़ों के जीवन-वृतांत से लिए गये कुछ महत्व्पूर्ण प्रसंग इस किताब में बांधे गये हैं
जो मुझे भारतीय होने पर गर्व करने क एक और सबब देते हैं !!
मसलन . . .

रामानंद चटर्जी इन्होनें अंग्रेजी माध्यम की ब्रेल लिपि को बदलकर बँगला भाषा के उभरे अक्षर तैयार कराए और दृष्टिहीन व्यक्तियों की पढ़ाई के लिए उपकरण जुटाए । बड़े बाबू (प्रख्यात नाम) ने कई जगह पर प्रेस और कार्यालय स्तापित किए, ये पुस्तक प्रकाशक भी थे । दासी, प्रवासी, प्रदीप और् मोर्डन रिव्यु (अंग्रेज़ी) जैसी कई पत्रिकाओं का संपादन किया । स्लाटर ऑफ द इन्नोसेंट्स लेख लिखकर छात्राओं को अवांछित परिक्षाओं से छुटकारा दिलाया । रविन्द्रनाथ टैगोर के साहित्य को विश्व स्तर पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था ।

प्रेमचन्द्र  देश की स्वतंत्रता के लिए प्रेमचन्द्र जी ने लिए लेखन किया । इन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में किसानों और मजदूरों की परिस्थितियों और समस्याओं का चित्रण किया । गांधीजी के सविनय अवज्ञा आंदोलनको स्वीकार किया । प्रेमचन्द्र जी उर्दू पत्र आवाज़े खल्कमें नवाबरायनाम से लिखा व सोज़ेवतनमें पाँच कहानियाँ लिखी, जिनमें स्वतत्रता का आवाहन था । इन आग्नेय कहानियों का प्रभाव इतना था कि धनपतरायलेखकीय नाम प्रेमचन्द्र को अपनी सरकारी नौकरी (डिप्टी इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल) भी छोड़नी पड़ी ।

इसके अतिरिक्त..

निराला जिनकी कविताओं को कुछ शास्त्रियों ने रबड़ छंदकहके उपहास उड़ाया ।
जूही की कली”,  “वह तोड़ती पत्थरजैसी कई श्रेष्ठ रचनाऐं लिखीं ।
मीराबाई जिनके पदों ने संगीत प्रधानता को वरीयता दी । इनमें घोर निराशा से आशा के आयाम मिलते हैं ।


जगदीश चन्द्र बसु (जीवधारियों व वनस्पतियों में साम्य) , डॉ. होमी जहाँगीर भाभा (कॉस्केड सिद्धांत) , डॉ. गोविंद खुराना ( इन्होनें औषधि और शरीर-क्रिया विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान देकर नोबल पुरस्कार 1962 प्राप्त किया ) , लोक प्रसिद्ध राट्रपति डॉ, राजेन्द्र प्रसाद , उधम सिंह ( जिन्होंने जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला जनरल डायर पर गोलियाँ चलाकर लिया ) व तुलसीदास जैसे विद्वानों से सम्बन्धित प्रेरणादायक किस्से दिये गए हैं ।