October 27, 2013

Worth Living for..


Photo Courtesy - Google

When you love someone whole heartedly
Distance doesn’t matter actually,
You close your eyes
And feel their presence.
Your teary eyelids remind you
Their  warm touch.
You feel your heartbeat
And rejoice their voice.
You remember those exquisite moments
And  Breath “ That  Special Smile”
Which  makes  you Alive
Which  gives  you Hope
Which  supplies you strength to deal with obstacles
Which  silently says “ It will be alright”
Which  teaches you “ Life is Beautiful, Live it with dignity”
Only That Optimistic Curve
Weaves The Everlasting Dream
Worth Living For . . .

- Ankita Chauhan 

September 23, 2013

बूंद भर इंसान


Photo Courtesy - Google

कुछ अल्लाह ढूंढ़ते हैं कुछ भगवान ढूढ़ते हैं
हम तेरे इस जहां में बूंद भर इंसान ढूंढ़ते हैं ...

कुछ कुरान में बताया कुछ कृष्ण ने सिखाया
खो-सा गया हमसे मोहब्बत का
वो पैगाम ढूंढ़ते हैं
हम तेरे इस जहां में बूंद भर इंसान ढूंढ़ते हैं ...

यथार्थता , इंसानियत
चंद कतरे वफा और चाँद भर रुमानियत
इन बुनियादी लहज़ो, 
बेज़ुबान हुए लफ्ज़ो को
दिल से महसूस करने वाली
इक ज़ुबान  ढूंढ़ते हैं
हम तेरे इस जहां में बूंद भर इंसान ढूंढ़ते हैं ...

तारों से झिलमिलाता आकाश
और उसे एकटक तकने के लिये खुली छत
खुली छत पर पसरे,
अपने नन्हे-नन्हे ख्वाबों का फ़लक निहारते बच्चे
उन्ही बच्चों के
लिखित अलिखित अरमान ढूंढ़ते हैं
हम तेरे इस जहां में बूंद भर इंसान ढूंढ़ते हैं ...

कुछ गम दुनिया से छुपाते हैं हम
और कुछ शायद 
खुद से भी
पढ़के हमारी आँख़ों से दर्द का हर पन्ना
और उस पन्ने पर तैरते 
संज्ञाहीन लम्हों में जो 
भर दे ज़िंदगी
ऐसा दिल-ए-नादां ढूंढ़ते हैं
हम तेरे इस जहां में बूंद भर इंसान ढूंढ़ते हैं ...!!


- अंकिता चौहान







August 23, 2013

रुख़सत



दिलों से खेलती इस उलझन को
तू रुख़सत कर दे,
लबों पर ठहरी हुई इस अनबन को
तू अब रुख़सत कर दे ...

जवाब जब भी ढूँढेगा तू
तन्हाइयों के,
हज़ारों लम्स बिखर जाएगें
रुसवाईयों के,
खिलखिलाती ज़िन्दगी का
हर पल जी ले ज़ानिब,
बेरंग टूटे ख्वाबों को
तू अब रुख़सत कर दे ...

तेरे होने न होने का अर्थ
जो तुझसे खो सा गया,
ख्वाहिशों के पंख खुलने का स्वर
जो तुझसे खो सा गया,
समय की रेत पर
फिर नई इबारतें लिख ज़ानिब,
अतीत की टूटी इमारतों को
तू अब रुख़सत कर दे ...

ज़र्रे-ज़र्रे में बहता था जो
खुशफहमी बन,
बेमाने हर उस शक्स,
हर उस रिश्ते को
तू अब रुख़सत कर दे ...!!


- Ankita chauhan



August 16, 2013

लिखते हैं, तो जीते हैं

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जब बहुत कुछ टूटता है अन्दर,
तब दर्द को लफ्ज़ों की दुशाला उड़ा
अभिव्यक्त करते हैं हम...

जब दिल की अर्ज़ियाँ ठुकरा दी जाती हैं
परिस्थितियों द्वारा,
तब कलम से उस क्षण को
शब्दों में कैद कर देते हैं हम...

जब हमारी सांसों में समाये ये रिश्ते ही हमसे
अपने वज़ूद का पता मांगते हैं,

तब अपने जैसे प्रत्येक बाशिन्दे का दर्द
अपने कागज़ी पंखों में भर
सुर्ख अँखियों में समा जाते हैं हम...

तुम्हारे रंज़-ओ-गम से उधड़ती
जीवन की रज़ाई को चंद हर्फों से सीते हैं,
हम लेखक हैं . . . लिखते हैं तो जीते हैं !!


   
 - Ankita Chauhan

P.s – Dedicated to all mesmerizing Writers.

August 12, 2013

मुरब्बा !



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अधरों पर मुस्कान की एक झूठी परत चड़ाए  पार्क में बैठी,
मैं निहार रही थी प्रकृति को तभी एक छवि उभरी और
कुछ शब्द 
खर्च कर दीजिए 
इन खिलखिलाते लम्हों को 
ताउम्र सहेज कर
क्या इनका मुरब्बा बनाइयेगा !
 कैंसर से संघर्षरत वो मुस्कुराता हुआ शक्स 
ज़िन्दगी भर गया मेरे निर्जीव हो चुके लम्हों में... !!

- अंकिता चौहान